नेशनल दर्पण : मनरेगा के कार्य में फर्जी फोटो अपलोड करने वालों की नौकरी जाएगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा में हो रही गड़बड़ी मामले में संज्ञान लिया है। मनरेगा अंडर सेक्रेटरी अभिषेक कुमार ने सूबे के प्रधान सचिव सहित अन्य पदाधिकारियों को पत्र लिखा है।

आपको बताते चलें कि ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा कहा गया है कि मनरेगा अंतर्गत एनएमएमएस एप के माध्यम से कार्यरत मजदूरों की उपस्थिति व फोटो लेने में गड़बड़ी हो रही है। उपस्थिति व फोटो लेने में गड़बड़ी के करण जिला और प्रखंड स्तर पर मनरेगा योजना के क्रियान्वयन की निगरानी पर प्रश्नचिन्ह व वित्तीय अनियमितताओं की संभावना को प्रबल करती है।

उक्त पत्र के आलोक में मनरेगा आयुक्त अभिलाषा कुमारी शर्मा ने जिलाधिकारी व उप विकास आयुक्त को मनरेगा अंतर्गत कार्यरत मजदूरों की उपस्थिति से संबंधित दिशा-निर्देश जारी किया है। जारी निर्देश में दोषी के एनएमएमएस प्रणाली के दुरुपयोग या जानबूझकर गलत फोटो अपलोड करने वाले जिम्मेदार उपयोगकर्ताओं और अधिकारियों की पहचान कर उनके विरुद्ध अनुशासानात्मक कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि इस प्रणाली का दुरुपयोग व इस प्रकार की पुनरावृत्ति को समाप्त किया जा सके।

दोषी पदाधिकारियों व कर्मियों से संबंधित कार्रवाई रिपोर्ट ग्रामीण विकास मंत्रालय भारत सरकार को प्राथमिकता के आधार पर नियमित रूप से प्रस्तुत किया जाएगा। इस आलोक में राज्य को समयबद्ध कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराया जाएगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर राज्य स्तर से निर्णय लिया गया है कि मौजूदा कर्मचारियों के साथ जिला और प्रखंड स्तर पर एनएमएमएस निगरानी प्रकोष्ठों का गठन किया जाएगा, जो एनएमएमएस के माध्यम से अपलोड किए गए फोटो की दैनिक जांच, फोटो सत्यापन और विसंगतियों की रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार होंगे।

अब तीन स्तर पर होगी अपलोड की गई तस्वीरों की निगरानी,

पंचायत स्तर पर पदाधिकरियों द्वारा सभी अपलोड की गई तस्वीरों व उपस्थिति का शतप्रतिशत सत्यापन किया जाएगा। प्रखंड स्तर पर कार्यक्रम पदाधिकार, प्रखंड स्तरीय स्थायी कर्मी व प्रखंड स्तरीय संविदा कर्मी द्वारा दो सौ तस्वीरों या अपलोड की गई तस्वीरों के 20 प्रतिशत, जो भी कम हो, रेंडम जांच करेंगे। जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम समन्वयक के द्वारा 30 तस्वीरों की जांच की जानी है। जिला स्तरीय स्थायी कर्मी के द्वारा 100 तस्वीरों या अपलोड की गई तस्वीरों का 10 प्रतिशत एवं जिला स्तरीय संविदा कर्मी के द्वारा 200 तस्वीरों या अपलोड की गई तस्वीरों का 10 प्रतिशत, जो भी कम हो की जांच दिन में रेंडम किया जाएगा।

हार्ड डिस्क में सभी तस्वीरें सहेजकर रखने का दिशानिर्देश,

15 दिनों के बाद मनरेगा साफ्ट पर तस्वीरें उपलब्ध नहीं होती। अपलोड की गई सभी तस्वीरें व श्रमिकों की उपस्थिति का विवरण अनिवार्य रूप से डाउनलोड करके जिला कार्यालय की हार्ड डिस्क में सहेजकर रखा जाएगा। जिला अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों प्रखंडवार से प्रत्येक कार्य के लिए, प्रत्येक दिन के लिए अपलोड की गई सभी तस्वीरों की एक साफ्ट कापी रखना है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण या सामाजिक अंकेक्षण के दौरान दस्तावेजीकरण के प्रमाण के रूप में इसकी आवश्यकता होगी। सभी तस्वीरें और आवश्यक जानकारी निगरानी या सामाजिक अंकेक्षण दल को प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा। यह अभिलेख कम से कम एक वर्ष या सामाजिक अंकेक्षण होने तक रखे जाएंगे।

मनरेगा में यह हो रही है गड़बड़ी,

  • अप्रासंगिक या असंबंधित तस्वीरों का अपलोड किया जाना
  • लाइव फोटो के बजाय फोटो टू फोटो कैप्चरिंग
  • फोटो बनाम दर्ज उपस्थिति में मजदूरों की संख्या में अंतर
  • श्रमिकों की लिंग संरचना में बेमेल
  • एक से अधिक मस्टर रोल में श्रमिकों की एक ही तस्वीर का पाया जाना
  • सुबह और दोपहर की तस्वीरों में श्रमिकों एवं उनकी संख्या में बेमेल
  • दोपहर के सत्र में फोटो अपलोड न करना

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