हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक और पूर्व मुख्यमंत्री व गढ़वाल से सांसद तीरथ सिंह रावत के लोकसभा टिकटों पर छाए संकट के बादल, 

आपको बताते चलें कि शनिवार को भाजपा की पहली लिस्ट में केवल हरिद्वार और गढ़वाल के प्रत्याशियों का नाम न होने की वजह से इन संभावनाओं को और ज्यादा बल मिल रहा है। सूत्रों के अनुसार पार्टी के कुछ और बड़े नेताओं की दावेदारी की वजह से हाईकमान ने इन दोनों को सीटों को होल्ड पर रख लिया है।

इन दोनों सीटों पर मौजूदा सांसदों को रिपीट करने के साथ-साथ ही नए चेहरों को भी मौका देने की संभावना पर भी गंभीरता से विचार किया जा रहा है। गढ़वाल सीट से इस वक्त तीरथ सिंह रावत और हरिद्वार सीट से रमेश पोखरियाल निशंक सांसद हैं।

निशंक पूर्व मुख्यमंत्री होने के साथ साथ मोदी सरकार में केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के अहम पद पर रह चुके हैं। हालांकि बाद में उन्हें मंत्रिमंडल से ड्रॉप कर दिया गया था। वहीं, तीरथ को हाईकमान एक बार उत्तराखंड के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दे चुका है।

बता दें कि जिस अप्रत्याशित रूप से उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी दी गई थी, उसी अप्रत्याशित रूप से छीन भी ली गई थी, इस वक्त दोनों की सीट पर पांच नए दावेदार भी हैं। भाजपा सूत्रों के अनुसार पूर्व राज्यसभा सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी का नाम गढ़वाल सीट के प्रबल दावेदार के रूप में चल रहा है।

इनके साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल के पुत्र शौर्य डोभाल का नाम गढ़वाल सीट के दावेदार के रूप में लंबे समय से चर्चा में है। वहीं पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत का नाम गढ़वाल के साथ साथ हरिद्वार सीट के लिए चल रहा है।

त्रिवेंद्र रावत के साथ ही हरिद्वार सीट के लिए पूर्व काबीना मंत्री व वर्तमान विधायक मदन कौशिक और पूर्व मंत्री यतीश्वरानंद भी पिछले काफी समय से टिकट की दौड़ में हैं।

अंतिम दो सीटों पर इस वक्त तीन तीन पूर्व मुख्यमंत्री टिकट की दौड़ में है। जहां निशंक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। वहीं तीरथ भी कुछ माह मुख्यमंत्री का दायित्व संभाल चुके हैं। पूर्व सीएम त्रिवेद्र रावत भी अपनी मौजूदगी बनाए हुए हैं।

सूत्रों का दावा है कि दोनों सीटों पर कोई भी चौंकाने वाले नतीजों सामने आने की संभावना  हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक लिहाज से उत्तराखंड भाजपा के लिए अनुकूल राज्य माना जाता है। ऐसे में यदि कोई उलझन न होती तो सभी सीटों पर नाम एक साथ ही घोषित किए जा सकते थे।

अब हाईकमान ने दोनों सीट पर निर्णय को रोका है तो इसके गहरे निहितार्थ है। हाईकमान सभी पहलुओं का अध्ययन कर रहा है। पार्टी नेतृत्व सिटिंग सांसद को भी दोबारा मौका दे सकता है। लेकिन इसकी भी पूरी पूरी संभावना है कि दोनों सीटों पर नए लोगों को ही उतार दिया जाए।

सूत्रों से मिली के अनुसार बीते रोज केंद्रीय पार्लियामेंट्री बोर्ड की बैठक में एक संसदीय सीट पर  नए नाम की चर्चा हुई थी। एक वरिष्ठ पदाधिकारी की ओर से सिटिंग सांसद के साथ ही एक वरिष्ठ नेता के नाम का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि बीते रोज पर उस पर चर्चा को रोक दिया गया।

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